ज्ञानवापी मस्जिद में मिला शिवलिंग, प्रशासन ने साक्ष्यों को किया सील, HC जाएगा मुस्लिम पक्ष, SC में कल सुनवाई, हरिहर पांडे का दावा- सर्वे में इतने सबूत मिलेंगे कि वकील रिपोर्ट बनाते-बनाते थक जाएंगे

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ज्ञानवापी मस्जिद में मिला शिवलिंग, प्रशासन ने साक्ष्यों को किया सील, HC जाएगा मुस्लिम पक्ष, SC में कल सुनवाई, हरिहर पांडे का दावा- सर्वे में इतने सबूत मिलेंगे कि वकील रिपोर्ट बनाते-बनाते थक जाएंगे

ज्ञानवापी परिसर के अंदर सर्वे टीम को शिवलिंग मिला है. यह बात सामने आने के बाद वाराणसी कोर्ट ने डीएम को आदेश दिया कि जिस जगह शिवलिंग मिला है, उसे तत्काल सील कर दें. वहां पर किसी भी व्यक्ति का प्रवेश वर्जित किया जाए. कोर्ट ने डीएम, पुलिस कमिश्नर और सीआरपीएफ कमांडेंट को यह आदेश दिया है. कोर्ट ने इन अधिकारियों को जगहों को संरक्षित और सुरक्षित रखने की व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदारी दी है. इसके बाद प्रशासन की टीम वहां पहुंची और अदालत के आदेशानुसार 9 ताले लगाकर साक्ष्य को सील किया. वहीं 1991 में ज्ञानवापी परिसर से मस्जिद हटवाने की याचिका दायर करने वाले हरिहर पांडे ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा, सर्वे में मंदिर होने की इतनी सामग्रियां और साक्ष्य मिले हैं कि वकील इसकी रिपोर्ट बनाते-बनाते थक जाएंगे. हरिहर कहते हैं, ये सारे साक्ष्य मैं अपनी आंखों से देख चुका हूं. मैं खुद ज्ञानवापी परिसर के नीचे गया था. वहां हमारा कूप (कुआं) मौजूद है. वही कूप, जिसे भगवान शंकर ने अपने त्रिशूल से बनाया था. परिसर के नीचे भगवान गणेश, हनुमान, अष्ट भैरव और नंदी की मूर्तियां हैं. अदालत में ये सभी बातें लोगों के सामने आ जाएंगी.

वाराणसी में सर्वे के दौरान ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है. हिंदू पक्ष के पैरोकार जितेंद्र सिंह बिसेन ने कहा, ज्ञानवापी में इतने साक्ष्य मिले हैं, जो अभी उजागर नहीं किए जा सकते हैं. बस अभी इतना बताना चाहता हूं कि करीब साढ़े 12 फीट का शिवलिंग मिला है. मैं अयोध्या की तरह 500 साल का इंतजार नहीं करूंगा. बाबा विश्वनाथ का भव्य मंदिर बनकर रहेगा और जल्द से जल्द बनेगा. उन्होंने संभावना जताई है कि उन्हें मथुरा में भी सफलता मिलेगी.

सर्वे में शामिल एक सूत्र के मुताबिक, यह वही शिवलिंग है, जिसे अकबर के वित्त मंत्री टोडरमल ने 1585 में स्थापित कराया था. तब उनके साथ बनारस के पंडित नारायण भट्‌ट भी थे. शिवलिंग का ऊपरी कुछ हिस्सा औरंगजेब की तबाही में क्षतिग्रस्त हो गया था. यह शिवलिंग बेशकीमती पन्ना पत्थर का है. रंग हरा है. हालांकि शिवलिंग के साइज को लेकर कई दावे सामने आए हैं. यह शिवलिंग श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित नंदी के सामने वाले ज्ञानवापी के हिस्से में है. नंदी महाराज के सामने जो तहखाना है, उसी में अंदर मस्जिद के बीचों-बीच आज भी शिवलिंग दबा है. इसका अरघा भी काफी बड़ा है.

दरअसल, ज्ञानवापी में सर्वे के लिए तीसरे दिन टीम गई थी. बताया जा रहा है कि वहां टीम को शिवलिंग नजर आया. सर्वे टीम में शामिल हिंदू पक्ष के वकील हरिशंकर जैन ने तुरंत वाराणसी कोर्ट में एप्लीकेशन दी. इसमें कोर्ट को बताया गया कि वहां पर शिवलिंग मिला है. यह बहुत ही महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं.

इससे पहले वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर का सर्वे तीसरे दिन आज पूरा हो गया. सर्वे के बाद हिंदू पक्ष के पैरोकार डॉ. सोहनलाल बाहर आए तो उन्होंने बड़ा दावा किया. कहा, अंदर बाबा मिल गए… जिन खोजा तिन पाइयां. तो समझिए, जो कुछ खोजा जा रहा था, उससे कहीं अधिक मिला है. अब पश्चिमी दीवार के पास जो 75 फीट लंबा, 30 फीट चौड़ा और 15 फीट ऊंचा मलबा है, उसके सर्वे की मांग उठाएंगे.

सर्वे करके बाहर आए मुस्लिम पक्ष के वकील ने हिंदू पक्ष के दावों का खारिज किया है. वकील ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं मिला. हम सर्वे से संतुष्ट हैं. कल, यानी 17 मई को कोर्ट में रिपोर्ट सौंपी जाएगी. बता दें कि एडवोकेट कमिश्नर के नेतृत्व में वादी-प्रतिवादी पक्ष के 52 लोगों की टीम सुबह 8 बजे परिसर में एंट्री की. करीब 10:30 बजे सर्वे खत्म हुआ. शृंगार गौरी-ज्ञानवापी प्रकरण के प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के एडवोकेट रईस अहमद अंसारी ने शिवलिंग मिलने के सवाल पर कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाना में एक फव्वारा लगा हुआ है. जिस संरचना को शिवलिंग बताया जा रहा है, वह वही फव्वारा है. बाकी सभी तरह के दावे झूठे हैं. मस्जिद के ऊपरी हिस्से में नमाज पढ़ी जाती है, वहां वजू करने की भी जगह है.

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